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बिना टकराए मंजिल तक,पहुंच पाना बड़ा मुश्किल।

खाकर ठोकरें गिरि सी,संभल जाना बड़ा मुश्किल ।
टूटे ख्वाब को फिर से,सजा पाना बड़ा मुश्किल।
नया इतिहास रचना है ,पड़ेगा मौत से लड़ना,
बिना टकराए मंजिल तक,पहुंच पाना बड़ा मुश्किल।
गिराएंगे तुम्हें बुझदिल, गिराना काम है उनका,
न गिरना सामने उनके, संभल जाना बड़ा मुश्किल।
जवानी है दीवानी तो, दीवानापन करो ऐसा,
लुटाओ प्रेम दुखियों पर, ये कर पाना बड़ा मुश्किल।
रहो तुम लाख महलों में, बड़प्पन कुछ नहीं इसमें,
सदियों तक हर एक के दिल में, रह जाना बड़ा मुश्किल।
खुशी अपनी खुशी में क्या, दुख औरों का सुना करिए,
किसी रोते दुखी मन को, हंसा जाना बड़ा मुश्किल।
अपने अरमान पर जीना, आता है सभी को पर,
किसी गैरों के अरमानों पे, जी जाना बड़ा मुश्किल।
सच की जिंदगी जीना, होता है कठिन लेकिन,
गलत को भी गलत कहकर, बता जाना बड़ा मुश्किल।
हंसी के क्षण हैं जीवन में, तो पीना भी पड़ेगा गम,
पर हर मुश्किल को हंसते-हंसते,पी जाना बड़ा मुश्किल।

“””” पं. निर्भय शुक्ल”””””

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