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नया उपभोक्ता संरक्षण कानून लागू

दिल्ली  : 20 जुलाई ,2020 को केंद्र सरकार ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम , 2019 लागू कर दिया। यह अधिनियम 1986 के उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की तुलना में उपभोक्ता को अधिक शक्ति देता है। पिछले कानून में जहां उपभोक्ता को शिकायत करने के लिए कंपनी के ऑफिस वाले स्थानीय कंज्यूमर फोरम में शिकायत करनी पड़ती थी इससे उपभोक्ता को काफी दिक्कत होती थी , जबकि अब उपभोक्ता शिकायत अपने रहने / काम करने वाले स्थान पर काम कर सकता है। जिला आयोग का मूल आर्थिक अधिकार क्षेत्र 20 लाख से १ करोड़ रुपये , प्रदेश आयोग का 1 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये तथा राष्ट्रीय आयोग 10 करोड़ रुपये से ऊपर के मामले में सुनवाई कर सकता है।
अधिनियम में ई – कॉमर्स से सम्बंधित प्रावधानों को अभी तक अधिसूचित नहीं किया गया है लेकिन इलेक्ट्रॉनिक सेवा प्रदाता से सम्बंधित एक सेक्शन को अधिसूचित किया गया है।
यदि विपरीत पक्ष राज्य आयोग में अपील करना चाहता है तो इसके लिए पहले उसे जिला आयोग द्वारा आदेशित राशि का 50% चुकाना पड़ेगा उसके बाद ही वह राज्य आयोग में अपील कर सकता है, पहले इस राशि की सीमा 25000 रुपये थी अब इसे हटा दिया गया है। राज्य आयोग में अपील करने की अवधि 30 से 45 दिन बढ़ा दी गयी है। अब विवादों को मध्यस्थता के माध्यम से भी निपटाने की अनुमति मिल सकेगी।
नए अधिनियम में उपभोक्ता की परिभाषा को व्यापक बनाया गया है तथा इसके अंतर्गत ऑफलाइन , ऑनलाइन , बहुस्तरीय तथा टेलीमार्केटिंग में काम कर रहे लोगों को भी मान्यता मिलेगी।
अधिनियम में भ्रामक विज्ञापनो , उत्पादों के सेलिब्रिटी समर्थन , सेंट्रल प्रोटेक्शन अथॉरिटी के गठन , ई – कॉमर्स आदि के बारे में कुछ प्रावधानों को अभी तक अधिसूचित नहीं किया गया है। ई – कॉमर्स की मौजूदा परिभाषा को एफडीआई दिशा – निर्देशों से अपनाया गया है। 1986 के उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम में कोई भी रेगुलेटरी बॉडी नहीं थी जिससे उपभोक्ता दिक्कत होती थी फ्रॉड की समस्या ज्यादा थी हालाँकि नए अधिनियम में रेगुलेटरी बॉडी CCPA ( central consumer protection Authority ) का भी गठन कर दिया गया है।

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